Showing posts with label krishna jayanti. Show all posts
Showing posts with label krishna jayanti. Show all posts

Thursday, 25 August 2016

गोकुळ अष्टमी चे मह्त्व जाणून घेण्यासाठी खालील लिंक वर क्लिक करा..

“कृष्णजन्माष्टमी”




भगवान श्रीकृष्णाने धर्माचे रक्षण करण्याकरिता  यादिवशी रात्री जन्म घेतला . तो  दिवस म्हणजेच “गोकुळ अष्टमी”(Gokul Ashtami) होय . श्रीकृष्णाचे आपणाला वरचेवर स्मरण व्हावे म्हणुन सर्व ठिकाणी “गोकुळ अष्टमी” हा सण उत्साहाने साजरा करतात . ज्यांच्या घरी “गोकुळ अष्टमी” असते त्यांनी यादिवशी उपवास करावा . श्रीकृष्णाचा रात्री १२ वाजता जन्म समारंभ साजरा करावा व दुसरे दिवशी पारणे करावे . प्रथम मातीचे गोकुळ तयार करावे . त्यासाठी काळी माती आणून चाळून भिजवून ठेवावी . आधी पाळणा तयार करावा. त्यात बळीराम, “श्रीकृष्ण”(Shree Krishna) तयार करून पाळण्यात निजवावे . तोडे , साखळ्या यासारखे मातीचे तयार केलेले दागिने घालावेत . पाटावर ताटाभोवती रांगोळी काढून हळद-कुंकू वहावे .बाळकृष्णाच्या प्रतिमेचे पुजन करतात.खालील साहित्य वापरून मनोभावे पुजा करावी



Poojaandsahitya
Shree Krishan


पुजा साहित्य / पुजा विधी :


२ गेजवस्त्र २ जानवी फणी ,करंडा, मंगळसुत्र ,खण तसेच देवातील बाळकृष्ण पुजेकरिता ठेवावा . २ बांगड्या, पंचामृत , पुजेचे साहित्य ,सुंठ, साखर,व खोबरे यांचा सुंठवडा ,तसेच डिंकाचा प्रसाद करावा ,प्रसादाकरिता केळ किंवा पेरू यांपैकी फळ आणावे . पुजा झाल्यावर “श्रीकृष्णाचा” पाळणा म्हणून आरती करून सुंठवडा वाटावा . बायकांना हळद -कुंकू दयावे . “गोकुळाष्टमीच्या” पारण्याला दही पोह्याचा नैवेद्य दाखवावा. गोकुळ अष्टमीचा दुसरा दिवस हा सार्वजनिक सण मोठ्या प्रमाणावर साजरा करतात.

We are at poojaandsahitya.com  providing  our best services in Poojasahitya and Online Booking of Pandit for Pooja.on the occasion of "Shravan" and especially for Mangalagaur u can book Paramparik Khel for more information visit us at poojaandsahitya.com



Wednesday, 24 August 2016

जानिया भगवान् श्री कृष्ण जी के 51 नाम और उन के अर्थ.

                  भगवान् श्री कृष्ण जी के 51 नाम और उन के अर्थ:.....           


1 कृष्ण     : सब को अपनी ओर आकर्षित करने वाला.।
2 गिरिधर : गिरी: पर्वत ,धर: धारण करने वाला। अर्थात गोवर्धन पर्वत को उठाने वाले।
3 मुरलीधर : मुरली को धारण करने वाले।
4 पीताम्बरधारी : पीत :पिला, अम्बर:वस्त्र। जिस ने पिले वस्त्रों को धारण किया हुआ है।
5 मधुसूदन : मधु नामक दैत्य को मारने वाले।
6 यशोदा या देवकी नंदन : यशोदा और देवकी को खुश करने वाला पुत्र।
7 गोपाल : गौओं का या पृथ्वी का पालन करने वाला।
8 गोविन्द : गौओं का रक्षक।
9 आनंद कंद : आनंद की राशि देंने वाला।
10 कुञ्ज बिहारी : कुंज नामक गली में विहार करने वाला।
11 चक्रधारी : जिस ने सुदर्शन चक्र या ज्ञान चक्र या शक्ति चक्र को धारण किया हुआ है।
12 श्याम : सांवले रंग वाला।
13 माधव : माया के पति।
14 मुरारी : मुर नामक दैत्य के शत्रु।
15 असुरारी : असुरों के शत्रु।
16 बनवारी : वनो में विहार करने वाले।
17 मुकुंद : जिन के पास निधियाँ है।
18 योगीश्वर : योगियों के ईश्वर या मालिक।
19 गोपेश :गोपियों के मालिक।
20 हरि : दुःखों का हरण करने वाले।
21 मदन : सूंदर।
22 मनोहर : मन का हरण करने वाले।
23 मोहन : सम्मोहित करने वाले।
24 जगदीश : जगत के मालिक।
25 पालनहार : सब का पालन पोषण करने वाले।
26 कंसारी : कंस के शत्रु।
27 रुख्मीनि वलभ : रुक्मणी के पति ।
28 केशव : केशी नाम दैत्य को मारने वाले. या पानी के उपर निवास करने वाले या जिन के बाल सुंदर है।
29 वासुदेव :वसुदेव के पुत्र होने के कारन।
30 रणछोर :युद्ध भूमि स भागने वाले।
31 गुड़ाकेश : निद्रा को जितने वाले।
32 हृषिकेश : इन्द्रियों को जितने वाले।
33 सारथी : अर्जुन का रथ चलने के कारण।
35 पूर्ण परब्रह्म :देवताओ के भी मालिक।
36 देवेश : देवों के भी ईश।
37 नाग नथिया : कलियाँ नाग को मारने के कारण।
38 वृष्णिपति : इस कुल में उतपन्न होने के कारण
39 यदुपति : यादवों के मालिक।
40 यदुवंशी : यदु वंश में अवतार धारण करने के कारण।
41 द्वारकाधीश : द्वारका नगरी के मालिक।
42 नागर :सुंदर।
43 छलिया : छल करने वाले।
44 मथुरा गोकुल वासी : इन स्थानों पर निवास करने के कारण।
45 रमण : सदा अपने आनंद में लीन रहने वाले।
46 दामोदर : पेट पर जिन के रस्सी बांध दी गयी थी। 
47 अघहारी : पापों का हरण करने वाले।
48 सखा : अर्जुन और सुदामा के साथ मित्रता निभाने के कारण।
49 रास रचिया : रास रचाने के कारण।
50 अच्युत : जिस के धाम से कोई वापिस नही आता है।
51 नन्द लाला : नन्द के पुत्र होने के कारण।
🙏🌺 ।। जय श्री कृष्णा ।। 🌺🙏
Read More At: http://www.poojaandsahitya.com/